Experience

Expanse of experience is needed through self study and inner delving. The teachings and learnings from scriptures are good but all of them have to be tuned this time and space. Those that doesn’t rhyme with heart, mind and consciousness at logical, rationale and analytical levels have to be discarded. This then allows one to see the stories within them at human level of Gross consciousness. This is the core reality and since the complexity in relations and ways become simple as per the time and space of its origin.

This level of understanding is crucial for them Only mind realises the situations and scenario in a normal sense of awareness rather than going with the flow of dramatics they are portraying.

Once mind realises then heart accepts or rejects them based on the state of mind you are seeing, knowing, relating, and experiencing them.

It is this acceptance or rejection that connects at conscious at Grossest, Gross, Subtle, Subtle and Subtlest levels. It then forms part of your persona and way of life.

~ Maitreya Rudrabhayananda

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नमस्कार

आत्म अध्ययन और आंतरिक खोज के माध्यम से अनुभव के विस्तार की आवश्यकता है। शास्त्रों की शिक्षाएं और सीख अच्छी हैं लेकिन उन सभी को इस समय और स्थान में बांधना होगा। जो तार्किक, तर्कसंगत और विश्लेषणात्मक स्तरों पर दिल, दिमाग और चेतना के साथ तुकबंदी नहीं करते हैं, उन्हें त्यागना होगा। यह तब व्यक्ति को उनके भीतर की कहानियों को स्थूल चेतना के मानवीय स्तर पर देखने की अनुमति देता है। यह मूल वास्तविकता है और चूंकि रिश्तों और तरीकों में जटिलता अपने मूल के समय और स्थान के अनुसार सरल हो जाती है।

उनके लिए समझ का यह स्तर महत्वपूर्ण है। केवल दिमाग ही स्थितियों और परिदृश्यों को जागरूकता के सामान्य अर्थों में महसूस करता है, बजाय इसके कि वे नाटकीयता के प्रवाह के साथ जा रहे हैं।

एक बार जब मन को पता चल जाता है तो दिल उन्हें उस मन की स्थिति के आधार पर स्वीकार या अस्वीकार कर देता है जिसे आप देख रहे हैं, जान रहे हैं, संबंधित कर रहे हैं और अनुभव कर रहे हैं।

यह स्वीकृति या अस्वीकृति है जो स्थूल, स्थूल, सूक्ष्म, सूक्ष्म और सूक्ष्म स्तरों पर सचेतन से जुड़ती है। यह तब आपके व्यक्तित्व और जीवन शैली का हिस्सा बन जाता है।

~ मैत्रेय रुद्रभयानंद

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Published by Maitreya

Walking the path of self is a condition but being on the path of selflessness brings one about to the pathless way. Come on the way of knowing the way and in the process bring about a change within to get liberated.

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